Sunday, May 18, 2014

बाराती

बारात में जाने का अवसर तो बहुत आते हैं मगर, जब कोई ऐसा अवसर आता हैं जिसमे दोस्त की शादी हो और जाने का मौका हो तो बात ही और हैं |
ऐसा ही एक अवसर मुझे भी मिला ओडिशा में अपने दोस्त संजय की शादी में जाने का | एक तरफ मोदी सरकार बन रही थी और दूसरी तरफ संजय की
शादी होने जा रही थी ,दोनों ही की उत्सुकता बहुत थी | खैर हम ओडिशा पहुंचे और हमारा स्वागत बड़े ही आदर भाव से हुआ |
मेरा एक ही मकसद था इस शादी में जाने का और वो था मस्ती और सिर्फ मस्ती |
घर पहुँचते ही सीधे संजय के घरवालों ने ठंडा और नास्ते से स्वागत किया | शाम तक  यूँ ही समय कटा  गया ,और मेरा मन फिर से ख़ुशी से झूम उठा की अब
बारात में जाने का समय आ गया था | हम तैयार होकर बैठे ही थे की संजय के दोस्तों ने हमें बताया की हमारे लिए एक गाड़ी की व्यवस्था की गयी हैं जिसमे खाने और पीने की उत्तम प्रबंध हैं | हमारी खुसी का ठिकाना न रहा और हम गाड़ी में बैठ गयी..धीरे धीरे गाड़ी अपने गंतव्य की ओर रवाना होने लगी
रस्ते में कई दौर आये जब हमने गाड़ी रोक कर कई बियर की बोतलों को खत्म किया ...काम खत्म करना कोई हमसे सीखे ...वैसे शादी में ये सामान्य सी बात होती हैं | मगर मेरा मकसद अभी भी बाकि था ओडिशा जिस चीज के लिए मसहूर हैं मुझे उसका इंतज़ार था | शादी में आये कुछ लोग मेरे इस तड़प को समझ  रहे थे | एक ने मुझे अकेले देख कर पुछा ..सर जी चहिए क्या...मैंने पुछा क्या? उसने कहा सर जी जिसका इंतज़ार कर रहे हो .भोले जी का प्रसाद |
मै मानो भक्क सा रह गया ,लेकिन तुरंत कहा हाँ हाँ चाहिए हैं ..वो मुस्कुराने लगा और कहा सर जी मेहमान हो हमारे ,आपकी सब ज़रुरत का सामान यहां रखा हैं | फिर मैंने तुरंत उससे कहा की भाई बहुत कमी खल रही थी बस दे दो मज़ा आ जायेगा | बस फिर क्या था उसने भोले बाबा का प्रसाद दिया और मैं खुसी से फूला नहीं समां रहा था | और जो नचा हूँ उसके बाद में फिर सीधे अगले दिन मुझे बताया गया की मैंने ३ घंटे नाच किया |
अगले दिन दोपहर को उठा और देखा की २-३ और दोस्त फिर से पूछ रही हैं की तिवारी जी कैसे रही रात
मैंने कहाँ मुझे कुछ याद नहीं हैं क्या हुआ कुछ नहीं पता | फिर उन्होंने पुछा एक और चलेगा मैं भला कैसे मना करता और बस वो समय था जब मैं हाँ कही उसके बाद मुझे खुद याद नहीं की कितने बार मैंने भोले बाबा का प्रसाद लेना सुरु किया और इस तरह ५ दिन बीत गया ..सुबह शाम  रात दिन २४ घंटे मैं बस बाबा के प्रसाद में डूबा रहता था ..वो दिन वो पल वो छिन मेरे ज़िन्दगी का एक अभूतपूर्व हिस्सा बन गया था .मैं चाह कर भी उस पल को भूल नहीं सकता ..
वो रात जब मुझे अजीब अजीब ख्याल आते थे ..आमिर  गरीब के सपने ....मगर जो मज़ा इन ६ दिनों में आया हैं वो मैं चाह कर भी दुबारा नहीं पा सकता ..

इसी उम्मीद के साथ की दुबारा फिर भोले बाबा का प्रसाद मिलेगा मेरा इंतज़ार जारी हैं


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